Sunday, 30 October 2011

त्रिदोष नाशक है आंवला


आंवला
जलनेति

शीर्षासन
सर्वांगासन
 औषधीय गुणों से भरपूर तथा विटामिन सी का प्रचूरतम भंडार आंवला जिसका नाम सभी ने सुना होगा | विभिन्न प्रान्त की भाषा के अनुरूप यह विभिन्न नामों से जाना जाता है | हिंदी में आमला ,आंवला  | संस्कृत में आमलक, धात्री,मराठी में आंवली, आंवल काठी| बंगला में आमलनी, अम्बोलारा| गुजराती में आंवला तथा अंग्रेजी में इंडियन गुज्वेरी आदि नामों से जाना जाता है| गुण धर्म व स्वाद की दृष्टि से आंवला कसैला, अम्ल-कटु, मधुर, शीतल हल्का, त्रिदोष नाशक, रुक्ष, दस्तावर केशों के लिए हितकारी मिचलाहट, अफारा, थकावट, रक्तविकार आदि व्याधियों के लिए चमत्कारी रूप से गुणकारी है| आंवले में नारंगी के रस से २० गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है| आंवले में गेलिक एसिड, टैनिक एसिड, शर्करा, एल्ब्यूमिन, सेल्युलोज तथा कैल्सीयम पाया जाता है| आंवले के फल का चूर्ण यकृत रोग, सिर दर्द, कब्ज, बवासीर व बदहजमी में प्रयोग करना अति उत्तम है| भयंकर अतिसार में आंवले और अदरक की लुगदी मिलाकर नाभि में रख देने पर अत्यधिक लाभ मिलता है| आंवले के बीज को रात भर जल में भीगा कर रखें अगले दिन पीसकर २५० ग्राम गौ दूध के साथ लेने पर पित्त की अधिकता में लाभ मिलता है| सूखे आंवले ३० ग्राम, बहेड़ा १० ग्राम, आम की गुठली की गिरी ५० ग्राम और २० ग्राम मेथी चूर्ण रात भर लोहे की कढ़ाही में भीगों कर रखें अगले दिन बालों में लेप करें निश्चित ही असमय पके बाल काले हो जाते है| आंवला का चूर्ण का नित्य सेवन व शीर्षासन व सर्वांगासन करने पर गंजापन अवश्य दूर होता है| आंवला नेत्र ज्योति वर्धक व बुद्धिवर्धक भी होता है| आंवला चूर्ण खाने व यौगिक क्रिया जलनेति करने से नेत्र ज्योति बढ़ती है | आवंला , रीठा व शिकाकाई तीनों का काढ़ा बनाकर सिर धोने से बाल मुलायम और घने होते हैं | हिचकी तथा उल्टी में आंवले की चटनी में मिश्री मिलाकर (खाना हितकारी होता है | ) पके हुए आंवलो  का रस निकालकर उसको खरल में डालकर घोटना चाहिए घोटते गाढ़ा कर लें इसके नित्य सेवन से पित्त का शमन होता है | इसकी २-५ ग्राम की मात्रा नित्य सेवन करने से घबराहट , बेचैनी , प्यास और पित्त का ज्वर दूर होता है |