Saturday, 23 July 2011

आधाशीशी(माइग्रेन) की अनुभूत सफल चिकित्सा योग व हर्बल में - योग व हर्बल विशेषज्ञ विजय श्रीवास्तव

कष्टदायी माइग्रेन
भ्रामरी प्राणायाम

आंवला
हरड
बहेड़ा
चिरैता
हल्दी
नीम
गिलोय
कपाल भाति


जल नेति की विधि
जल नेति का लोटा

माइग्रेन अर्थात आधे सिर का दर्द. यह बहुत ही कष्टदायक रोग है, अधिकांशतः देखा गया है की इस रोग का कष्ट सूर्योदय से दोपहर तक रहता है और दोपहर के बाद घटना प्रारंभ हो जाता है वैसे तो यह रोग त्रिदोषज (वाट काफ और पित्त) होता है, लेकिन अधिकांश मामले में यह देखा गया है की वायु के कुपित होने पर वायु जब ऊपर की ओर बढ़ती है तब माइग्रेन का दौरा होता है तब गर्दन के नीचे टेम्पोरल धमनी फ़ैलाने और सिकुड़ने लगाती है. इसका असर गर्दनके आस पास की नसों पर पड़ता है जिसके परिणाम स्वरुप एक विशेष प्रकार का रासायनिक स्राव होता है जिससे सिर में दर्द बढ़ने लगता है. इस रोग का सबसे प्रमुख कारण समय से भोजन न करना, क्रोध, अनिद्रा, चिंता, जल्दीबाजी, मसाले इत्यादि का अधिक सेवन करना आदि है. नैदानिक दृष्टि से इसका नुस्खा घर पर भी तैयार किया जा सकता है- हरड, बहेड़ा, आंवला, चिरैता, हल्दी, नीम की छाल व गिलोय इन सब को सम मात्रा में लेकर कूट लें और करीब १५ ग्राम पाउडर को २०० ग्राम पानी में खौलाकर काढ़ा बांयें और ५० ग्राम शेष रहने तक खौलाएं तत्पश्चात छान लें और नित्य प्रातः खाली पेट और रात्रि में सोने से पूर्व कुछ दिन तक लें निश्चित ही लाभकर होगा. योग की दृष्टि से मैगरें के लिए जल नेति की क्रिया, कपाल भाति, अनुलोम विलोम व भ्रामरी प्राणायाम अत्यंत लाभकारी है.

1 comment:

हरीश सिंह said...

बहुत ही सार्थक और जानकारी भरा लेख है यह, इसका लाभ अधिक से अधिक लोंगो को मिले लिहाजा आप और भी ब्लॉग पर जाय और प्रचार प्रसार करे ताकि अधिक लोग लाभ उठा सके. शुभकामना