Thursday, 4 August 2011

स्वास्थ्य रक्षा में योग व औषधीय फूलों की भूमिका-योगाचार्य विजय श्रीवास्तव


Yogacharya Vijay ke sath videshi shishya
स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है जिसके लिए योग के विभिन्न आसन, प्राणायाम, ध्यान व षट्कर्म आदि अति महत्व पूर्ण घटक हैं| यह कहा जा सकता है की शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए आसन प्राणायाम व षट्कर्म का अभ्यास अपेक्षित है| योग के द्वारा न केवल शरीर सौष्ठव, स्फूर्ति आदि की प्राप्ति होती है बल्कि मन की एकाग्रता व स्वांस की क्रिया नियंत्रित होती है| शरीर में विद्यमान वाट काफ व पित्त का संतुलन बना रहता है, ध्यान लगता है, रोगों के निवारण में सहायता मिलती है, शरीर की मांसपेसियों में प्रसार व संकुचन की प्रक्रिया तीव्र होती है, शरीर में रक्त संचार भी व्यवस्थित होता है|
पुष्प चिकित्सा भी योग की ही भाँति स्वास्थ व चिकित्सा की दृष्टि से अचूक चिकित्सा पद्धति है, फूलों को शरीर पर धारण करने से शरीर की शोभा, काँटी, सौंदर्य, व श्री की वृद्धि तो होती है साथ ही फूलों की सुगन्धि रोग नाशक भी है, फूलों के सभी अवयव उपयोगी होते हैं, इनके यथाविधि उपयोग से अनेक रोगों का शमन किया जा सकता है| यहाँ कुछ पुष्पों के औषधि गुण दिए जा रहे हैं जो निम्नवत हैं-

गुलाब
- पेट और आंतो की गर्मी शांत करके ह्रदय को प्रसन्न करता है तथा मस्तिष्क को ठंडा करता है|
कमल- कमल की पंखुड़ियों को पीस कर उबटन में मिलाकर चहरे पर मलने से चहरे की सुन्दरता बढ़ती है| इनके फूलों से तैयार गुलकंद का उयोग कब्ज निवारण हेतु किया जाता है|
सूरजमुखी- इसका तेल ह्रदय रोगों में कोलेस्ट्रोल को कम करता है, इसमें विटामिन ए तथा डी होता है|
गेंदा- इसके गंध से मक्षर दूर भागते हैं, लीवर के रोगों, लीवर में सूजन, पथरी एवं चर्म रोगों में इसका प्रयोग किया जा सकता है|
चमेली- इसके पत्ते चबाने से मुह के छाले तुरंत दूर हो जाते हैं, पायरिया, दन्त शूल, फोड़े फुंसियों, चर्म रोगों व नेत्र रोगों में चमेली का तेल अत्यंत गुणकारी है|
केशर- यह शक्तिवर्धक, वमन को भी रोकने वाला तथा वात, कफ तथा पित्त नाशक है, दूध या पान के साथ इसके सेवन से यह ओज, बल, शक्ति व स्फूर्ति प्रदान करता है|
लौंग
- दाढ़ या दन्त शूल में मुह में दाल कर चूसने से लाभ होता है, अमाशय और अन्तो में रहने वाले उन सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करती है जिनके कारण पेट फूलता है|
गुड़हल- इसके फूलों को पीसकर बालों में लेप करने से बालों का गंजापन मिटता है, यह शीतवर्धक,बाजीकारक तथा रक्तशोधक है,
कचनार- इसकी कली बार बार मलत्याग की प्रवृत्ति को रोकती है| कचनार के फूल की पुलटिस बनाकर बनाकर घाव या फोड़े पर लगाने से लाभ मिलाता है|
नीम
-  यह संक्रामक रोगों से रक्षा करता है| नीम के फूलों को पीस कर पानी में घोलकर छानले और शहद मिलाकर पीने से वजन कम होता है|
हरश्रृंगार- इसका लेप चहरे की काँटी को बढाता है| यह गठिया रोग का नाशक है|
केवड़ा- केवड़ा फूल का इत्र सिर दर्द व गठिया में उपयोगी है, इसके फूल का तेल उत्तेजक व श्वांस विकार में लाभकारी होता है|
          इसी प्रकार अनेक अन्य फूल भी हैं जिनमे औषधीय गुण विद्यमान है|
(नोट:- निकट भविष्य में अन्य भी बहुत से फूलों के औषधीय गुणों के बारे में लेख प्रकाशित किये जायेंगे|)

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