Wednesday, 16 January 2013

डेंगू से सुरक्षा - योग व हर्बल में है विद्यमान - (योगाचार्य विजय श्रीवास्तव)

डेंगू 
योगाचार्य विजय श्रीवास्तव 











 एक तरफ वर्तमान में चारों ओर फैलता जा रहा है डेंगू का आतंक । डेंगू से होने वाली मौतों से लोग डरते जा रहे हैं। गन्दगी के साम्राज्य से, गंदे पानी के इकट्ठे होने पर भी बढ़ रहे है डेंगू फैलाने वाले मच्छर । सरकारी स्वस्थ्य महकमा डेंगू फैलने के बाद दवा का छिडकाव व स्वछता पर ध्यान देते हैं। निजी अस्पतालों में एन. एस.- १ टेस्ट तथा सरकारी अस्पतालों में एलिसा टेस्ट कराया जारहा है इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मान्यता भी दी गयी है । डेंगू का सबसे बड़ा दुष्परिणाम है की पीड़ित के शरीर से प्लेटलेट्स की मात्रा निरंतर घटती चली जाती है, जिससे शरीर के अन्दर रक्त प्रवाह होने लगता है ऐसी स्थिति में मरीज़ की मौत हो सकती है । डेंगू वायरस के संक्रमण से होता है। इसके इलाज के लिए एलोपैथ में कोई विशेष एंटीबायोटिक दवा उपलब्ध नही है, एलोपैथिक चिकित्सा में इसका सफल इलाज है प्लेटलेट्स चढ़ाना, जो प्रत्येक अस्पतालों में संभव नही है और महँगा भी है तथा साथ चिकित्सक कुछ प्रज्ज्वलन रोधी दवाएं भी देते है । किन्तु ऐसी स्थिति में एलोपैथिक चिकित्सा के साथ साथ योग के अंतर्गत आने वाला महत्वपूर्ण प्राणायाम " नाड़ी शोधन प्राणायाम " तथा हर्बल की दृष्टि से पपीते के पत्ते का रस अति उपयोगी सिद्ध होगा व चमत्कारी प्रभाव दिखायेगा । डेंगू का प्रभाव ही न हो इसके लिए सतर्कता की दृष्टि से एक सप्ताह ताजा गिलोय का एक इंच टुकड़ा प्रतिदिन प्रातः लेना व नियमित अनुलोम विलोम प्राणायाम, भ्रस्त्रिका प्राणायाम तथा घरेलू औषधीय मसालों पर आधारित हर्बल चाय या काढ़ा जिसमें काली मिर्च, तेज पत्ता, दालचीनी, लवंग, सोंठ, अजवायन जैसे रोग प्रतिरोधी गुणों से युक्त सामग्रियों के समावेशों का सेवन अति उपयोगी है । लाक्षणिक दृष्टि से अकस्मात् तेज बुखार, रक्तचाप की कमी, पसीना युक्त बुखार, आँखों में लालिमा, दिल धड़कने की गति का कम हो जाना, आँखों में जलन, पीठ के नीचले भाग यानी कमर में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, आँखों के उपरी भाग पर दर्द, ठण्ड लगना, बेचैनी तथा सिर में दर्द ये सब डेंगू के संभावित संकेत हैं, जिसके लिए उपरोक्त योग व हर्बल नुस्खे अवश्य लाभकारी सिद्ध हो सकते है।
हर्बल चिकित्सा की दृष्टि से गुरूच (गिलोय), तुलसी, गुड़, भूमि आंवला, कुटकी और कालमेघ के समभाग मिश्रण का काढ़ा डेंगू से बचाव के लिए एक विश्वसनीय नुस्खा है। विजयसार की छाल व प्याज का काढ़ा भी निश्चित ही उपयोगी सिद्ध होगा।

शीत ऋतु में अत्यधिक प्रभावशाली है होम मेड हर्बल टी व अजवायन का सेवन - योगाचार्य विजय श्रीवास्तव




   ♦  शीत ऋतु में,





ठण्ड से बचने के लिए लोग तरह तरह की युक्ति व जुगाड़ में लगे रहते हैं, रूम हीटर, ब्लोअर, अलाव, कउड़ा, शरीर पर कई कपडे भी लाद लेंगे यहाँ तक कि कुछ लोग घरों से निकलना भी बंद कर देते हैं।

 चाय पर चाय भी पी जाते हैं जो कि  नुकसान देय है क्योंकि चायपत्ती  के माध्यम से शरीर में अत्यधिक निकोटिन जाना स्वास्थ्य  के लिए हानिकारक है।



किन्तु यदि हम कुछ घरेलू मसालों के माध्यम से घर पर हर्बल पेय बनाकर केवल दिन में दो बार सेवन कर लें, एकाक बार थोड़ी सी अजवायन फांक लें तथा योगासन की दृष्टि से सूर्य नमस्कार व् योग मुद्रासन तथा प्राणायाम की दृष्टि से भ्रस्त्रिका व सूर्यभेदी  प्राणायाम शरीर को अतिरिक्त उर्जा व ऊष्मा देता है ।
           
      हर्बल पेय के लिए निम्नांकित सभी सामान जैसे काली मिर्च, छोटी इलायची, तेजपत्ता, लवंग, दालचीनी, मुलेठी, अजवायन, सोंठ, पीपर, स्याह जीरा इत्यादि को सम मात्रा में लेकर पाउडर बना कर एक में मिला लें।



  अनुपात की दृष्टि से दो कप पानी में उक्त मिश्रण का पाउडर १/२ चम्मच, एक चम्मच शक्कर, चार तुलसी पत्ती, आवश्यकतानुसार दूध डाल कर खौला लें। चायपत्ती डालने की आवश्यकता नहीं है, अब इसे छान कर चुस्की लेते
        हुए शरीर को स्वस्थ रखें।
    यहाँ यह बताना आवश्यक है कि इस पेय पदार्थ व अजवायन के अलग सेवन से शरीर को ऊष्मा व उर्जा तो मिलेगी ही साथ ही साथ शीत ऋतु में होने वाली समस्याएँ जैसे सर्दी, खांसी, गले की खराश, टांसिल रोग, काफ, सीने की जकड़न, बुखार, उल्टी , कोल्ड डायरिया इत्यादि से मुक्ति मिलेगी।
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योग की विभिन्न मुद्राएँ : योगाचार्य विजय श्रीवास्तव

♦ उत्तम स्वास्थय के लिए योग
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♦ योग द्वारा रोग निवारण
♦ योग से जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज संभव

 ♦ योग की विभिन्न मुद्राओं में योग व हर्बल विशेषज्ञ विजय श्रीवास्तव

ध्यान मुद्रा में योगाचार्य विजय श्रीवास्तव
Yogacharya Vijay Shriwastava in the posture of meditation



शीर्षासन की मुद्रा में योगाचार्य विजय श्रीवास्तव







बचें विषैले और नशीले कफ सीरप से, बनायें घर पर हर्बल कफ सीरप - योगाचार्य विजय श्रीवास्तव

 शीत ऋतु पर विशेष

सर्दी खांसी, गले में खराश, कफ इत्यादि की समस्या में निश्चित ही बाजारू कफ सीरप प्रभावशाली व लाभ पहुचाते है लेकिन यह भी सत्य है की इसका शरीर पर निश्चित ही अतिरिक्त दुष्प्रभाव भी पड़ता है ।

क्योकि आये दिन कुछ न कुछ देश विदेश के समाचारों से भी पता चलता है कि कफ सीरप पिने से मौत। ये तो आज कल बहुतायत सुनने को मिलता है कि कुछ कफ सीरप में अल्कोहल जैसे नशीले पदार्थों कि अधिकता व मिलावट के कारण लोग चिकित्सा के लिए कम बल्कि नशा के लिए बाजारों से कफ सीरप का पर्योग कर ले रहे है जिसका की निश्चित ही शरीर पर कुप्रभाव पड़ता है । बेहतर यह होगा कि यदि हम इसे हर्बल्स अर्थात घरेलु प्राकृतिक जड़ी बूटियों के सहयोग से घर पर तैयार कर लें तो यह अपना चमत्कारी लाभ तो दिखायेगा ही और न ही कोई दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट ) होगा । यदि २५० मि.ली. पानी में १/२ चम्मच सोंठ, काली मिर्च, पीपर व छोटी इलायची का पाउडर, एक चम्मच शक्कर व एक चम्मच तुलसी पत्ती का पेस्ट मिलकर धीमी आंच पर खौलाकर आधा हो जाने तक पकाएं, तत्पश्चात उसे छान लें उसके बाद उसमें दो चम्मच शहद व चौथाई नीबू का रस मिलाकर ठंडा होने दें ।                                                                 
                                                                      
  अब ये तैयार हो गया होम मेड अति उत्तम हर्बल कफ सिरप । सेवन की दृष्टि से दिन में तीन से चार बार लेना श्रेयष्कर होगा । छोटे बच्चों को छोडकर अन्य आयुवर्ग के लोग यदि उक्त हर्बल सिरप के अलावा शीत को दृष्टिगत करते हुए योग के अंतर्गत आने वाले भ्रस्त्रिका व सुर्यभेदी प्राणायाम तथा सूर्य नमस्कार व योग मुद्रासन का नियमित अभ्यास शारीरिक क्षमतानुसार नियमित करें तो शारीरिक ऊष्मा व उर्जा बनी रहेगी