Tuesday, 18 September 2012

♦ गुडहल का फूल और अनुलोम विलोम प्राणायाम दोनों ही हैं उत्तम रक्त शोधक ♦


शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो गुड़हल के फूल को जानता पहचानता नहीं होगा | हाँ यह जरुर है कि अलग अलग भाषाओँ व क्षेत्र में यह अलग - अलग नामों से जाना जाता है | हिंदी में इसे गुड़हल और ओडहुल नामों से जाना जाता है, बंगला में जवा, संस्कृत में जपाती संध्या, गुजराती में जासुद, मराठी में जास्वंद व अंग्रेजी में हिस्विस्कस नाम से जाना जाता है | यह पुष्प आदि शक्ति माँ दुर्गा को अति प्रिय है इसीलिए बहुत से लोग इसे देवी फूल भी कहते हैं | यह फूल जितना देखने में सुन्दर होता है उससे कई गुना ज्यादा इसमें औषधीय गुण भी विद्यमान है | जिस तरह योग शास्त्र में रक्तशोधक के रूप में अनुलोम विलोम प्राणायाम को महत्वपूर्ण बताया गया है उसी प्रकार फूलों में गुड़हल के फूल को उत्तम रक्तशोधक माना गया है | गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाकर बालों में लगाने से बाल रेशम की तरह मुलायम व चमकदार होते हैं साथ ही गंजापन दूर होता है  | गुण धर्म की दृष्टि से यह मधुर, कफ - पित्त शामक, रक्तशोधक , पुष्टिकारक, मूत्रल तथा रक्तार्श, रक्तातिसार, स्मरण शक्ति की दौर्बल्यता, बुखार, ह्रदय रोग, दाद, प्रमेह, प्रदर, उन्माद, आदि में लाभप्रद है |
गुड़हल की कली का नित्य प्रातः सेवन जोड़ों के विकारों हेतु श्रेयष्कर है, इसके सेवन से जोड़ों को गतिशील रखने वाले फ्यूल का उत्पादन व्यवस्थित रहता है किन्तु याद रहे कली का हरा हिस्सा सेवन नही करना है | गुड़हल का फूल चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं | उन्माद रोग  दूर करने वाला यह एकमात्र पुष्प है, पेट की गर्मी से होने वाले रोगों में गुड़हल का गुलकंद या शरबत काफी हितकारी तो होता ही है साथ ही गुड़हल के पुष्प का शरबत ह्रदय को पुष्प की भाँति प्रफुल्लित करने वाला होता है | गुड़हल का पुष्प रक्तशोधक, रक्त वर्धक, मन मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करने वाला तथा प्रबल शक्ति वर्धक होता है |

Tuesday, 11 September 2012

मोटापा कम करने में सहायक "सूर्य नमस्कार" आसन व अश्वगंधा की पत्ती - योगाचार्य विजय श्रीवास्तव


वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखा जाये तो आज हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी काया पर चर्बी न हो यानि मोटापा न रहे | सच पूछा जाये तो मोटापा तो रोग की श्रेणी में आता है | इसलिए इस मोटापे से बचने के लिए कोई डायटिंग तो कोई डांस तो कोई तैराकी तो कोई मॉर्निंग वाक तो कोई जॉगिंग तो कोई रस्सी कूदता है, लेकिन योग व हर्बल के द्वारा मोटापा पूरी तरह से नियंत्रित हो जाता है | योग के अंतर्गत आने वाले सूर्य नमस्कार आसन के द्वारा तथा अश्वगंधा के नियमित चार पत्ती के सेवन से निश्चित ही मोटापे से मुक्ति मिलती है | नित्य लौकी का जूस भी सेवन करने से बढ़ती हुई चर्बी को रोका जा सकता है | यदि मोटापा से ग्रसित व्यक्ति यदि वर्ष में दो बार चंद्रायण व्रत कर ले तो निश्चित तौर पर बीस किलो वजन घट जाता है | उपरोक्त के अलावा नित्य यौगिक क्रियाओं के अलावा कुछ बिन्दुओं पर भी व्यक्ति अगर ध्यान दे तो सोने पे सोहागा की तरह काम करेगा जैसे रोज कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना, नित्य कम से कम एक से दो किलो मीटर पैदल चलना, ऐसा खाद्य पदार्थ लेना जिसमें 'वसा' कम हो तथा फाइबर की मात्रा अधिक हो, घर के इर्द गिर्द, मुहल्लों इत्यादि पास-पड़ोस में जाने के लिए पैदल ही जाएँ | आहार संतुलित हो | जूस इत्यादि ऐसे लिक्विड पदार्थों का सेवन करें जिसमें कैलोरी व शुगर न के बराबर हो | दिन भर में खाद्य पदार्थों के माध्यम से जितनी कैलोरी शरीर में जा रही है कोशिश करके शारीरिक श्रम के माध्यम उस कैलोरी को अनिवार्य रूप से बर्न करना चाहिए | कोशिश यह भी करनी चाहिए कि घर पर छत इत्यादि पर जाने के लिए बनी सीढ़ी पर दिन में कई बार नियमित रूप स चढ़ें उतरे | योग-व्यायाम व हर्बल तथा उपरोक्त को जीवन चर्या में सम्मिलित कर लें तो निश्चित ही मोटापा नामक रोग से छुटकारा पा सकते हैं |



Saturday, 1 September 2012

" एक अनार सौ बीमार "


बहुत पुरानी कहावत है " एक अनार सौ बीमार " | इस कहावत का लोग तरह तरह का अर्थ लगाकर इसे बदनाम करते हैं, कहते हैं कि एक अनार के पेड़ से सौ बीमार होते हैं | लेकिन मेरे हिसाब से अनार वह महाऔषधि है जिसके एक पेड़ से सैकड़ो बीमारियों का इलाज होता है | अनार वह फल है जो पूरे संसार में पाया जाता है | भारत के विभिन्न भाषा क्षेत्र के हिसाब से भिन्न नामों से जाना  जाता है जैसे हिंदी में अनार, मराठी में डालिम्ब, बंगला में दाड़िम व दाड़िमी, संस्कृत में दाडिम, दंतबीजक, तेलगु में दानिम्भ पंडू, गुजराती में दाड्यम, दाडम, अंग्रेजी में पोमेग्रेनेट तथा लैटिन भाषा में प्युनिका ग्रेनेटम इत्यादि नामों से उच्चारित किया जाता है |


                                                           
गुण धर्म कि दृष्टि से यदि देखा जाये तो मीठा अनार तृप्तिकारक, त्रिदोष नाशक, हल्का किंचित कसैला, शुक्रजनक, मलावरोधक, स्निग्ध, बलवर्धक, स्मरण शक्ति वर्धक होता है | साथ ही दाह, तृषा, ज्वर, मुख दुर्गन्ध, हृदयरोग, मुख रोग व कंठ रोग  नाशक है | पित्तशामक, कृमिनाशक पेट रोगों के लिए हितकारी, घबराहट दूर करने वाला अनार स्वर तंत्र, फेफड़े, यकृत,  दिल, आमाशय तथा आँतरोगों के लिए विशेष हितकर है | अनार में एंटीवायरल, एंटीआक्सीडेंट, एंटीट्यूमर इत्यादि जैसे तत्त्व पाए जाते हैं | अनार विटामिन  का एक अच्छा स्रोत है जिसमें विटामिन ए, सी तथा ई की प्रचुरता होती है | पेट की गड़बड़ी और मधुमेह जैसे रोगों में अनार काफी फायदेमंद है | अनार का छिलका, पेड़ की छाल, पत्तियां और अनार के फूल के  सेवन से पेटदर्द में राहत मिलती है | पाचन तंत्र की सभी समस्याओं के निदान में अनार कारगर तो है ही साथ ही अनार की पत्तियों की चाय बनाकर पीने से पाचन सम्बन्धी समस्याओं में आराम मिलता है | दस्त और कालरा जैसी बीमारियों में अनार का जूस पीने से राहत मिलती है | मधुमेह के रोगियों को अनार खाने की सलाह दी जाती है | इससे कारोनरी रोगों का खतरा कम होता है | अनार में आयरन की प्रचुरता होती है, अनार का सेवन व योग के अंतर्गत आने वाले अनुलोम विलोम प्राणायाम तथा कपालभाति की क्रिया रक्त की कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | सूखे अनार के छिलकों का चूर्ण दिन में ३-४ बार एक - एक चम्मच ताजा पानी के साथ लेने से बार बार पेशाब आने की समस्या ठीक हो जाती है, अनार के छिलकों को पानी में उबाल कर उससे कुल्ला करने से श्वास की बदबू समाप्त हो जाती है, अनार के छिलकों का चूर्ण सुबह शाम आधा आधा चम्मच सेवन करने से बवासीर में भी लाभ मिलता है | खांसी में अनार के छिलके को मुँह में रखकर धीरे धीरे ३-४ बार चूसते रहने से लाभ मिलता है |