Thursday, 30 August 2012

आम का आध्यात्मिक व औषधीय महत्व - योगाचार्य विजय श्रीवास्तव






दुनिया भर में खाए व पाए जाने वाला फल "आम" जो फलों के राजा के रूप में जाना जाता है, हाँ अलग-अलग भाषाओँ में इसे अलग-अलग नामों से उच्चारित किया जता है, हिंदी में आम, आम्र, मराठी में आंबा, संस्कृत में कामबल्लभ, आम्र, गुजराती में अम्बो, बंगला में आम्र, अंग्रेजी में मैंगो तथा लैटिन में मैग्नीफेरा इंडिका आदि नामों से जाना जता है | अगर हम अध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो प्रत्येक पूजन व कलश स्थापना में आम की पत्ती का विशेष महत्व होता है, प्राकृतिक रूप से सूख कर गिरे आम की लकड़ी व पत्तियां हवन- यज्ञ कार्यों के लिए प्रयोग किये जाने पर उद्देश्य की पूर्ति में अतिउपयोगी सिद्ध होता है | औषधीय गुण व धर्म से कच्चा आम कषाय, अम्ल,वात एवं पित्त वर्धक और पका आम मधुर, स्निग्ध, बल तथा सुखदायक वात नाशक , शीतल, अग्नि, काफ और वीर्यवर्धक होता है | 
उज्जायी प्राणायाम

 आम के बौर शीतल रुचिकारक, अतिसार, वातकारक, प्रदर और रुधिर रोग नाशक है | आम का रस दूध के साथ लेना शक्ति व वीर्यवर्धक होता है | पके आम में विटामिन ए तथा सी प्रचुर मात्रा में पाया जता है | आम की गुठली का प्रयोग मुख रोग, कफ, वात तथा मधुमेह हेतु गुणकारी है | आम की गुठली का प्रयोग बाल झड़ना व रुसी में भी काफी लाभकारी है | आम के पत्तों को शहद में मिलाकर सेवन करने से हिचकी रोग शांत हो जाता है | छाया में सुखाये गए १० ग्राम आम के पत्ते का १/२ किग्रा जल में खौलाए हुए काढ़ा का सेवन मधुमेह में अपना चमत्कारी प्रभाव दीखता है | देशी आम का २५० ग्राम रस, ५० एम. एल. गोदुग्ध और ५ ग्राम अदरक रस व १० ग्राम मिश्री मिलाकर लस्सी कि तरह फेंट ले और २-३ सप्ताह तक सेवन करना आँखों और यकृत के लिए काफी उपयोगी है | शरीर के समस्त अवयवों को शक्ति प्रदान करने के लिए आम के १० पत्ते को १ ली. पानी में डालकर खौलाएं जिसमे कम से कम १½ ग्राम इलायची का  पाउडर पडा हो, ½ हो जाने पर स्वादानुसार दूध व शक्कर मिला कर चाय की तरह सेवन करना चाहिए | आम की गुठली को जल के साथ पत्थर पर पीस कर लगाने से भंवरा, बर्रे,मधुमक्खी, बिच्छू, या विषैले कीड़े- मकोड़े के दंश से उत्पन्न वेदना, विष,जलन तथा दाह को शांत करता है | आम तथा योग के अंतर्गत आने वाला उज्जायी प्राणायाम समस्त प्रकार के कंठ रोगों  के लिए अत्यंत लाभकारी है | आम के कच्चे फल के अत्यधिक सेवन से मन्दाग्नि, विषम ज्वर, रक्तदोष, मलबद्धता जैसे रोग उत्पन्न होते है | आम खाने के तुरंत बाद जल नही पीना चाहिए | इतने सारे गुणों के कारण ही तो आम फलों का राजा कहलाता है |

Tuesday, 14 August 2012

भारत माता की जय



यहाँ उपस्थित इस ब्लॉग के सभी पाठकों को मेरी ओर से हमारे प्यारे देश के ६६वें स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं |
       आज इस अवसर पर देश पर मिटने वाले शहीदों की याद में कुछ पंक्तियाँ अपने उद्बोधन के रूप में रखना चाहता हूँ | यह तो सभी जानते हैं की १५ अगस्त भारत का स्वतन्त्रता दिवस है, आज़ादी हमें स्वत: नहीं मिल गई अपितु एक लम्बे संघर्ष और हजारों लाखों लोगों के बलिदान के पश्चात ही भारत आजाद हो पाया था |
     सन अट्ठारह सौ सत्तावन की प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के  यज्ञ का आरम्भ किया महर्षि दयानंद सरस्वती ने और इस यज्ञ को पहली आहुति दी मंगल पाण्डेय ने | देखते ही देखते यह  यज्ञ चारों ओर फैल गया | झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे, नाना राव जैसे योद्धाओं ने इस स्वतन्त्रता के यज्ञ में अपने रक्त की आहुति दी | दूसरे चरण में सरफरोशी की तमन्ना लिए रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु आदि देश के लिए शहीद हो गये | तिलक ने स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है का उदघोष किया, सुभाष चन्द्र बोस ने तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा का मंत्र दिया | अहिंसा और असहयोग का अस्त्र लेकर महात्मा गाँधी और गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ने को तत्पर लौह पुरुष सरदार पटेल ने अपने प्रयास तेज कर दिए | नब्बे वर्षों की लम्बी संघर्ष यात्रा के बाद पंद्रह अगस्त सन उन्नीस सौ सैंतालिस को भारत को स्वतन्त्रता देवी का आशीर्वाद मिल सका और हमारा देश गुलामी की बेड़ियों से मुक्त होकर स्वतंत्र हुआ | और इस आज़ादी को सुरक्षित रखना हमारा प्रथम कर्तव्य है | इस हेतु हम इस नारे के साथ इसकी रक्षा का संकल्प लेते हैं :-
                                                                
                                                                  प्यारा भारत , देश हमारा |
                                                                  इसकी रक्षा कौन करेगा???
                                                                हम करेंगे, हम करेंगे, हम करेंगे...

Saturday, 11 August 2012

हड्डियों के दर्द में रामबाण है "सुदर्शन का रस" - योगाचार्य विजय श्रीवास्तव







सुदर्शन एक ऐसा पौधा है जो लगभग अधिकतर उद्यानों व घरो में गमलों की शोभा बढ़ाते हैं इस वनौषधि को आमतौर पर सुन्दरता के लिए लगाते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सुदर्शन के पत्तों में हड्डियों के दर्द को हरने की अद्भुत क्षमता है ये तमाम औषधीय गुणों से भी परिपूर्ण है | इस पौधे का रस हड्डियों के दर्द में चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है | इसके पत्ते को आग पर गर्म करके दर्द वाले स्थान पर लपेटना काफी श्रेयष्कर है | यह पौधा घरों में फूल पत्ती लगाने के लिए बनायी गयी क्यारियों और पार्कों में बहुतायत दिखाई देती है, इसका फूल बड़ा, सुन्दर, सफ़ेद व सुगन्धित होता है | इसकी पत्तियों में वेदना हरने का अचूक गुण विद्यमान है , कहीं भी दर्द होने पर उस स्थान पर इसे पीस कर बाँध देने से जल्द ही पर्याप्त राहत मिल जाती है | सुदर्शन की पत्तियों का रस निकाल कर एक - एक बूँद कान में डालने पर तत्काल प्रभाव दिखाता है | हड्डियों के विकार व पीड़ा के लिए सुदर्शन की पत्ती से निर्मित लेप के प्रयोग के साथ साथ कुछ आसन व यौगिक क्रियाएं भी करनी चाहिए , जिसमें उत्कट आसन,  बद्धकोणआसन, त्रिकोणआसन, पद्मासना व कपालभाति इत्यादि का व्यवहारिक जीवन में प्रयोग काफी हितकारी सिद्ध होता है |
पहचान की दृष्टि से सुदर्शन का पौधा छोटा व लम्बी पत्ती वाला होता है इसमें सफ़ेद फूल निकलता है जो सुगन्धित होने के साथ ही सुंदर होता है , इसका आकर्षण देखने लायक होता है |